हे विश्वात्मा, ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति, पालन और विनाश, ये तीनों ही आपके अंश के अंश के अंश के अंश मात्र द्वारा ही संपन्न होते हैं। आज मैं आपकी शरण में आई हूँ, हे परमेश्वर।
O Universal Soul, the creation, sustenance and destruction of the universe—all these are accomplished by a fraction of a fraction of a fraction of a fraction of Your part. O Lord, I have come to Your refuge today.
तात्पर्य
श्रील श्रीधर स्वामी इस श्लोक की व्याख्या इस प्रकार करते हैं: वैकुंठ के स्वामी, नारायण, श्री कृष्ण के एक विस्तार हैं। महा-विष्णु, प्रथम निर्माता, भगवान नारायण के विस्तार हैं। कुल भौतिक ऊर्जा महा-विष्णु की दृष्टि से उत्सर्जित होती है, और उस कुल भौतिक ऊर्जा के तीनों गुण प्रकृति के विभाजित भाग हैं। इस प्रकार यह श्री कृष्ण हैं, जो अपने विस्तारों के माध्यम से कार्य करते हुए, ब्रह्मांड को उत्पन्न करते हैं, बनाए रखते हैं और विघटित करते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥