उस समय, हे कुरुश्रेष्ठ, सब जगह पूजनीय देवकी को अपने दोनों पुत्रों, कृष्ण तथा बलराम को सम्बोधित करने का मौका मिला। इससे पहले उन्होंने बड़ी हैरानी से यह सुना था कि उनके ये बेटे अपने गुरु के बेटे को मौत से वापस ले आए थे। अब वह कंस द्वारा मारे गए अपने पुत्रों के बारे में सोचकर बहुत दुखी हुईं और आँखों में आँसू भरकर कृष्ण तथा बलराम से दीनतापूर्वक बोलीं।
At that very time, O best of the Kurus, the universally revered Devaki found occasion to address her two sons, Krishna and Balarama. Earlier she had heard with great amazement that these sons of hers had brought back from death the son of their teacher. Now she became very sad thinking of her sons slain by Kamsa and with tearful eyes spoke humbly to Krishna and Balarama.
तात्पर्य
कृष्ण के प्रति वसुदेव का प्रेम इसलिए अशांत रहता था क्योंकि उनकी पराक्रम सम्पन्नता का आभास उन्हें कृष्ण को पुत्र मान कर देखने से विरोधाभासी लगता था। थोड़े भिन्न ढंग से देखें तो देवकी के दिवंगत पुत्रों के लिए विलाप करने के कारण उनका प्रेम थोड़ा विचलित रहता था। तो कृष्ण ने यह व्यवस्था की है कि उन्हें इस भ्रम से मुक्त कर दिया जाए कि उनके वास्तविक पुत्र वे स्वयं के अलावा और कोई भी हैं। क्योंकि यह माना जाता है कि देवकी की पूजा महान आत्माओं द्वारा की जाती है, तो उनके द्वारा मातृत्व स्नेह प्रदर्शित करना दरअसल उनके योग-माया का प्रभाव हो सकता है, जो उनके लीलाओं के आनंद को बढ़ाता है। इसीलिए पद 54 में देवकी को "मोहिता मायाया विष्णोः" अर्थात "भगवान विष्णु की आंतरिक ऊर्जा द्वारा मोहित" बताया गया है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥