Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.85.24: वास्तव में परमात्मा एक है। वह स्व-प्रकाशित और शाश्वत, पारलौकिक और भौतिक गुणों से रहित है। परंतु इन्हीं गुणों के माध्यम से उसने सृष्टि की है, जिससे एक ही परम सत्य उन गुणों के विस्तारों में अनेक रूप में प्रकट होता है। | bhagavat अध्याय 10.85: कृष्ण द्वारा वसुदेव को उपदेश दिया जाना तथा देवकी-पुत्रों की वापसी । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वास्तव में परमात्मा एक है। वह स्व-प्रकाशित और शाश्वत, पारलौकिक और भौतिक गुणों से रहित है। परंतु इन्हीं गुणों के माध्यम से उसने सृष्टि की है, जिससे एक ही परम सत्य उन गुणों के विस्तारों में अनेक रूप में प्रकट होता है।
In reality, God is one. He is self-illuminated and eternal, divine and devoid of physical qualities. But through these qualities, he has created the universe, due to which the same Supreme Truth appears in many forms in the parts of those qualities.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥