सूतीगृहे ननु जगाद भवानजो नौ
सञ्जज्ञ इत्यनुयुगं निजधर्मगुप्त्यै ।
नानातनूर्गगनवद् विदधज्जहासि
को वेद भूम्न उरुगाय विभूतिमायाम् ॥ २० ॥
अनुवाद
निस्संदेह, जब आप प्रसूति गृह में थे तो आपने हमें बताया था कि आप अजन्मे हैं और पूर्व के युगों में हमारे पुत्र के रूप में कई बार जन्म ले चुके हैं। आपने धर्म की रक्षा के लिए इन दिव्य शरीरों को प्रकट किया और फिर उन्हें छुपा लिया, जैसे बादल प्रकट होते हैं और गायब हो जाते हैं। हे सर्व महिमाशाली और सर्वव्याप्त भगवान, आपके विभूति अंशों की मोहक और भ्रामक शक्ति को कौन समझ सकता है?
Indeed, You had already told us in the labor room that You are unborn and have taken birth as our son many times in previous ages. After manifesting these transcendental bodies, You hid them, just as clouds appear and disappear, in order to protect Your Dharma. O most glorious, omnipresent Lord, who can understand the illusory illusion of Your glorious portions?
तात्पर्य
भगवान कृष्ण पहली बार सुतपा और प्रीष्णी के रूप में अपने पिछले जन्म में वसुदेव और देवकी के रूप में पैदा हुए थे। बाद में वे फिर से कश्यप और अदिति के रूप में उनके माता-पिता बने। तो, यह तीसरी बार था जब वह उनके पुत्र के रूप में प्रकट हुए थे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥