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bhagavat 10.85.16: अच्छे सौभाग्य से व्यक्ति को स्वस्थ मनुष्य-जन्म प्राप्त होता है - एक सुनहरा अवसर जो कि अत्यंत ही कम लोगों को प्राप्त होता है। लेकिन हे प्रभु, यदि इसके बाद भी वह अपने लिए जो सर्वोत्तम है, उसके प्रति भ्रमित रहता है, तो आपकी माया उसे अपना सारा जीवन व्यर्थ करने के लिए बाध्य कर देगी।   |   bhagavat अध्याय 10.85: कृष्ण द्वारा वसुदेव को उपदेश दिया जाना तथा देवकी-पुत्रों की वापसी   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 85: कृष्ण द्वारा वसुदेव को उपदेश दिया जाना तथा देवकी-पुत्रों की वापसी  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  10.85.16 
यद‍ृच्छया नृतां प्राप्य सुकल्पामिह दुर्लभाम् ।
स्वार्थे प्रमत्तस्य वयो गतं त्वन्माययेश्वर ॥ १६ ॥
 
 
अनुवाद
अच्छे सौभाग्य से व्यक्ति को स्वस्थ मनुष्य-जन्म प्राप्त होता है - एक सुनहरा अवसर जो कि अत्यंत ही कम लोगों को प्राप्त होता है। लेकिन हे प्रभु, यदि इसके बाद भी वह अपने लिए जो सर्वोत्तम है, उसके प्रति भ्रमित रहता है, तो आपकी माया उसे अपना सारा जीवन व्यर्थ करने के लिए बाध्य कर देगी।
 
Fortunately a living entity can attain a healthy human life, which is a rare opportunity. But O Lord, if he still remains attached to what is best for him, Your illusion can force him to waste his entire life.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)