Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 10.84.71: उन्होंने नगर के लोगों को बताया कि यदुओं के स्वामी वसुदेव ने कौन-कौन से यज्ञ किये थे। तीर्थयात्रा के दौरान उन्होंने अपने प्रियजनों से मुलाक़ात की थी, साथ ही और भी कई घटनाएँ घटी थीं, इन्हीं सब बातों को उन्होंने विस्तार से बताया।   |   bhagavat अध्याय 10.84: कुरुक्षेत्र में ऋषियों के उपदेश   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 84: कुरुक्षेत्र में ऋषियों के उपदेश  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  10.84.71 
जनेभ्य: कथयां चक्रुर्यदुदेवमहोत्सवम् ।
यदासीत्तीर्थयात्रायां सुहृत्सन्दर्शनादिकम् ॥ ७१ ॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने नगर के लोगों को बताया कि यदुओं के स्वामी वसुदेव ने कौन-कौन से यज्ञ किये थे। तीर्थयात्रा के दौरान उन्होंने अपने प्रियजनों से मुलाक़ात की थी, साथ ही और भी कई घटनाएँ घटी थीं, इन्हीं सब बातों को उन्होंने विस्तार से बताया।
 
He told the people of the city about the sacrificial festivals performed by Vasudeva, the lord of the Yadus, and about all the events that had happened during his pilgrimage, especially how he met his loved ones.
 
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध दस के अंतर्गत चौरासी अध्याय समाप्त होता है ।
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)