श्री वसुदेव ने कहा : हे भाई, भगवान ने ही स्नेह नामक गाँठ बाँधी है, जो इंसानों को एक-दूसरे के साथ मजबूती से जोड़े रखती है। मुझे लगता है कि बड़े-बड़े वीरों और योगियों के लिए भी इससे मुक्त होना बहुत ही कठिन होता है।
Sri Vasudev said: O brother, God himself has tied a knot called affection, which binds human beings strongly to each other. I think it is difficult for even the greatest warriors and Yogis to get free from it.
तात्पर्य
वीर पुरुष अपने व्यक्तिगत लगावों को इच्छाशक्ति से पार करने का प्रयास करते हैं, जबकि आत्मतत्वाभिमुख योगी ज्ञान के माध्यम से यही लक्ष्य पाने का प्रयास करते हैं। लेकिन भगवान की माया का भ्रम किसी भी सुनियोजित आत्मा से अधिक शक्तिशाली होता है। केवल माया के प्रभु कृष्ण की शरण लेकर ही व्यक्ति उनके प्रभाव से मुक्त हो सकता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥