वसुदेव ने विभिन्न प्रकार के वैदिक यज्ञों को यथाविधि सम्पन्न करके सभी यज्ञों की सामग्री, मंत्रों तथा अनुष्ठानों द्वारा ईश्वर की पूजा की। उन्होंने यज्ञ की अग्नि में आहुतियाँ डाल कर और यज्ञ-पूजा के अन्य नियमों का पालन करके मुख्य और गौण यज्ञों को पूरा किया।
Performing various types of Vedic sacrifices according to proper rites and rituals, Vasudeva worshipped God with all the paraphernalia of sacrifices, mantras and rituals. He performed the main and secondary sacrifices by pouring oblations into the sacred fire and observing other aspects of sacrifice worship.
तात्पर्य
वैदिक अग्नि-यज्ञ अनेकों प्रकार के हैं, और उनमें से हर एक क्रियाकाण्डों से भरा हुआ है। वैदिक आश्रुति के ब्राह्मण भाग में सबसे प्रमुख यज्ञों जैसे कि ज्योतिष्टोम और दर्शपूर्णमास की ही पूर्णतः क्रमिक प्रक्रिया दी गई है। इन्हें ही प्राकृत या मूल यज्ञ कहते हैं। अन्य यज्ञों के विशिष्ट विवरणों का अनुमान यही प्राकृत नियमों के आधार पर किया जाता है, और ऐसा करना मीमांसा के सख्त नियमों के अनुसार ही होता है। इसलिए अन्य यज्ञों को, जिन्हें मूल या प्राकृत यज्ञों से निकाला जाता है, विकृत या "परिवर्तित" कहते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥