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bhagavat 10.84.48: वसुदेव ने अपनी पत्नियों के साथ मिलकर दीक्षा ली। उनकी पत्नियाँ रेशमी साड़ियाँ पहने हुए थीं और चूड़ियाँ, हार, पायल और झुमके पहने हुए थीं। वसुदेव ने मृगचर्म पहना हुआ था, जिससे वे बहुत सुंदर लग रहे थे।   |   bhagavat अध्याय 10.84: कुरुक्षेत्र में ऋषियों के उपदेश   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 84: कुरुक्षेत्र में ऋषियों के उपदेश  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  10.84.48 
ताभिर्दुकूलवलयैर्हारनूपुरकुण्डलै: ।
स्वलङ्कृताभिर्विबभौ दीक्षितोऽजिनसंवृत: ॥ ४८ ॥
 
 
अनुवाद
वसुदेव ने अपनी पत्नियों के साथ मिलकर दीक्षा ली। उनकी पत्नियाँ रेशमी साड़ियाँ पहने हुए थीं और चूड़ियाँ, हार, पायल और झुमके पहने हुए थीं। वसुदेव ने मृगचर्म पहना हुआ था, जिससे वे बहुत सुंदर लग रहे थे।
 
Vasudev took initiation along with his wives. His wives were wearing silk saris and were adorned with bangles, necklaces, anklets and earrings. Vasudev's body was wrapped in deerskin, which made him look very beautiful.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)