श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 84: कुरुक्षेत्र में ऋषियों के उपदेश  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  10.84.47 
तमभ्यषिञ्चन् विधिवदक्तमभ्यक्तमृत्विज: ।
पत्नीभिरष्टादशभि: सोमराजमिवोडुभि: ॥ ४७ ॥
 
 
अनुवाद
वसुदेव ने अपनी आँखों में काजल लगाया और अपने शरीर पर ताज़ा मक्खन लगाया, तब पुरोहितों ने शास्त्र के अनुसार उन और उनकी अठारह पत्नियों पर पवित्र जल छिड़का। अपनी पत्नियों से घिरे हुए वसुदेव तारों से घिरे राजसी चाँद जैसे लग रहे थे।
 
After applying kajal to Vasudeva's eyes and smearing his body with fresh butter, the priests initiated him by sprinkling holy water on him and his eighteen queens as per the classical ritual. Surrounded by his wives, he looked like the majestic moon surrounded by stars.
तात्पर्य
देवकी वसुदेव की मुख्य पत्नी थीं, परन्तु उनकी अन्य सह-पत्नियाँ भी थीं, जिनमें उनकी छह बहनें भी थीं। इस तथ्य को श्रीमद् भागवतम के नौवें सर्ग में दर्ज किया गया है:

देवकश्चोग्रसेनश्च

चत्वारो देवकात्मजाः

देववान् उपदेवश्च

सुदेवो देववर्धनः

तेषां स्वसारः सप्तषन्

धृतदेवादयो नृप

शान्तिदेवोपदेवाश्च

श्रीदेवा देवरक्षित

सहदेवा देवकी च

वसुदेव उवाहा ताः

"आहुक के दो पुत्र हुए, जिनके नाम देवक और उग्रसेन थे। देवक के चार पुत्र हुए, जिनके नाम देववान, उपदेव, सुदेव और देववर्धन थे, और उनकी सात पुत्रियाँ भी थीं, जिनके नाम शान्तिदेवा, उपदेवा, श्रीदेवा, देवरक्षित, सहदेवा, देवकी और धृतदेवा थीं। धृतदेवा सबसे बड़ी थीं। कृष्ण के पिता वसुदेव ने इन सभी बहनों से विवाह किया।" (भाग. 9.24.21-23)

वसुदेव की कुछ अन्य पत्नियों का उल्लेख कुछ श्लोकों बाद किया गया है:

पौरवी रोहिणी भद्रा

मदिरा रोचना इला

देवकी-प्रमुखाश्चासन्

पत्न्या आनकदुन्दुभेः

"देवकी, पौरवी, रोहिणी, भद्रा, मदिरा, रोचना, इला और अन्य सभी आनकदुन्दुभि [वसुदेव] की पत्नियाँ थीं। उन सभी में, देवकी उनकी प्रमुख पत्नी थीं।" (भाग. 9.24.45)

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)