Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.84.44-45: जब महाराज वसुदेव यज्ञ के लिए दीक्षित होने वाले थे, हे राजा, तो वृष्णिजन स्नान करके, सुंदर वस्त्र और कमल की मालाएँ पहनकर दीक्षा-मंडप में आए। अन्य राजा भी भव्य शृंगार करके आए और साथ में उनकी प्रसन्नचित्त रानियाँ भी थीं। उनके गलों में रत्न-जटित हार थे और उन्होंने सुंदर वस्त्र पहने थे। ये रानियाँ चंदन के लेप से सजी थीं और हाथों में पूजा की शुभ सामग्री लिए हुए थीं। | bhagavat अध्याय 10.84: कुरुक्षेत्र में ऋषियों के उपदेश । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब महाराज वसुदेव यज्ञ के लिए दीक्षित होने वाले थे, हे राजा, तो वृष्णिजन स्नान करके, सुंदर वस्त्र और कमल की मालाएँ पहनकर दीक्षा-मंडप में आए। अन्य राजा भी भव्य शृंगार करके आए और साथ में उनकी प्रसन्नचित्त रानियाँ भी थीं। उनके गलों में रत्न-जटित हार थे और उन्होंने सुंदर वस्त्र पहने थे। ये रानियाँ चंदन के लेप से सजी थीं और हाथों में पूजा की शुभ सामग्री लिए हुए थीं।
O King, when Maharaja Vasudeva was about to be initiated into the sacrifice, the Vrishnis came to the initiation place after bathing and wearing beautiful clothes and garlands of lotus flowers. The other kings also came well-dressed. Their delighted queens accompanied them. They wore jeweled necklaces around their necks and were dressed in beautiful clothes. These queens had applied sandalwood paste and held auspicious articles of worship in their hands.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥