हे प्रभु, एक द्विज तीन प्रकार के ऋण लेकर जन्म लेता है - देवताओं का ऋण, मुनियों का ऋण, और अपने पूर्वजों का ऋण। यदि वह यज्ञ, शास्त्र-अध्ययन और संतानोत्पत्ति के द्वारा इन ऋणों को चुकाए बिना ही अपने शरीर का त्याग कर देता है, तो वह नरक में चला जाएगा।
O Lord, a Dwija is born with three kinds of debts—debts to the gods, debts to the sages and debts to his forefathers. If he gives up his body without clearing these debts by performing yajnas, studying scriptures and begetting children, he will go to hell.
तात्पर्य
एक ब्राह्मण के विशेष दायित्वों के सम्बन्ध में शास्त्र कहते हैं, जायमानो व ब्राम्हणो त्रिभिृ ऋणवान् जायते ब्रम्हचर्येण ऋषिभ्यो यज्ञेन देवेभ्यः प्रजया पितृभ्यः: 'जब भी एक ब्राह्मण जन्म लेता है, तीन ऋण उसके साथ जन्म लेते हैं। वह ऋषियों के प्रति अपने ऋण का भुगतान ब्रह्मचर्य के द्वारा, देवताओं के प्रति अपने ऋण का भुगतान यज्ञ के द्वारा, और अपने पितृ ऋण का भुगतान सन्तानोत्पति द्वारा कर सकता है।'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥