Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 10.84.38: धनवान् पुरुष को चाहिए कि यज्ञ करके और दान-कर्मों के द्वारा धन-सम्पदा की अपनी इच्छा को त्यागना सीखे। उसे गृहस्थ जीवन के अनुभव से पत्नी और संतान की अपनी इच्छा का परित्याग करना चाहिए। हे संत वसुदेव, समय के प्रभाव का अध्ययन करके अगले जीवन में उच्च पदवी पाने की अपनी इच्छा का परित्याग करना सीखना चाहिए। जिन साधुओं ने वासना का परित्याग कर दिया है और अपनी आसक्ति से मुक्त हो गए हैं, वे तपस्या करने के लिए जंगल में चले जाते हैं।   |   bhagavat अध्याय 10.84: कुरुक्षेत्र में ऋषियों के उपदेश   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 84: कुरुक्षेत्र में ऋषियों के उपदेश  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  10.84.38 
वित्तैषणां यज्ञदानैर्गृहैर्दारसुतैषणाम् ।
आत्मलोकैषणां देव कालेन विसृजेद्ब‍ुध: ।
ग्रामे त्यक्तैषणा: सर्वे ययुर्धीरास्तपोवनम् ॥ ३८ ॥
 
 
अनुवाद
धनवान् पुरुष को चाहिए कि यज्ञ करके और दान-कर्मों के द्वारा धन-सम्पदा की अपनी इच्छा को त्यागना सीखे। उसे गृहस्थ जीवन के अनुभव से पत्नी और संतान की अपनी इच्छा का परित्याग करना चाहिए। हे संत वसुदेव, समय के प्रभाव का अध्ययन करके अगले जीवन में उच्च पदवी पाने की अपनी इच्छा का परित्याग करना सीखना चाहिए। जिन साधुओं ने वासना का परित्याग कर दिया है और अपनी आसक्ति से मुक्त हो गए हैं, वे तपस्या करने के लिए जंगल में चले जाते हैं।
 
A wise man should learn to renounce his desire for wealth by performing sacrifices and by charitable acts. He should learn to renounce his desire for wife and children by the experience of domestic life. O saint Vasudeva, he should learn to renounce his desire to go to higher regions in the next life by studying the effects of time. Self-controlled sages who have thus renounced their attachment to domestic life retire to the forest to perform austerities.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)