Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.84.31: इस दुनिया में, बहुत करीबी होने से तिरस्कार पैदा हो जाता है। उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति जो गंगा नदी के किनारे पर रहता है वह अपने को शुद्ध करने के लिए गंगा नदी की उपेक्षा करके किसी दूसरे जल स्रोत पर जा सकता है। | bhagavat अध्याय 10.84: कुरुक्षेत्र में ऋषियों के उपदेश । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस दुनिया में, बहुत करीबी होने से तिरस्कार पैदा हो जाता है। उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति जो गंगा नदी के किनारे पर रहता है वह अपने को शुद्ध करने के लिए गंगा नदी की उपेक्षा करके किसी दूसरे जल स्रोत पर जा सकता है।
In this world, as familiarity increases, disrespect grows. For example, a person who lives on the banks of the Ganga ignores the Ganga and goes to some other water body for his purification.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥