श्री वसुदेव ने कहा: हे सभी देवताओं के अभ्यर्थनालय, मैं तुम्हें प्रणाम करता हूं। हे ऋषियो, कृपया मेरी बात सुनें। कृपया हमें बताएं कि आगे के कर्मों द्वारा किसी के कर्म की प्रतिक्रियाओं का प्रतिकार कैसे किया जा सकता है?
Sri Vasudev said: O shelter of all the gods, I salute you. O sages, please listen to me. Please tell us how the karma-phalam of a man can be destroyed by doing more karma?
तात्पर्य
यहाँ वासुदेव ऋषियों को "सभी देवताओं का निवास" कहकर संबोधित करते हैं। उनके बयान की पुष्टि आधिकारिक श्रुति-मंत्रों में की गई है, जो घोषणा करते हैं, यावतीर वे देवताः ताः सर्वा वेद-विदि ब्राह्मणे वसन्ति: "जो भी देवता हैं, वे सभी वेद जानने वाले ब्राह्मण में निवास करते हैं।"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥