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bhagavat 10.84.27: शुकदेव गोस्वामी ने कहा: हे ज्ञानी राजन्! इस प्रकार कहकर मुनियों ने दाशार्ह, धृतराष्ट्र तथा युधिष्ठिर से विदाई ली और अपने-अपने आश्रमों में वापस जाने के लिए तैयार हो गए।   |   bhagavat अध्याय 10.84: कुरुक्षेत्र में ऋषियों के उपदेश   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 84: कुरुक्षेत्र में ऋषियों के उपदेश  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  10.84.27 
श्रीशुक उवाच
इत्यनुज्ञाप्य दाशार्हं धृतराष्ट्रं युधिष्ठिरम् ।
राजर्षे स्वाश्रमान् गन्तुं मुनयो दधिरे मन: ॥ २७ ॥
 
 
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा: हे ज्ञानी राजन्! इस प्रकार कहकर मुनियों ने दाशार्ह, धृतराष्ट्र तथा युधिष्ठिर से विदाई ली और अपने-अपने आश्रमों में वापस जाने के लिए तैयार हो गए।
 
Sukadeva Goswami said: O wise king, having said this, the sages took permission from Dasharha, Dhritarashtra and Yudhishthira to leave and began getting ready to go to their respective ashramas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)