मन-मना भव मद-भक्तो
मद-याजी माँ नमस्करु
माँ एवैषयसि युक्तैवम्
आत्मानं मत-परायणः
"अपना मन हमेशा मेरा चिन्तन करने में लगाओ, मेरे भक्त बनो, मुझे प्रणाम करो और मेरी पूजा करो। मुझ में पूरी तरह से लीन होने पर, निश्चित रूप से तुम मुझ तक पहुँचोगे।” (भगवदगीता 9.34)
