श्रीला श्रीधर स्वामी का सुझाव है कि श्रीमद्-भागवतम का यह श्लोक भगवान कृष्ण के एक संभावित आपत्ति का उत्तर देता है: "यदि मैं वासुदेव का पुत्र हूँ तो मैं ब्रह्मांड का निर्माण, पालन और विनाश कैसे कर सकता हूँ?" उत्तर शब्दों द्वारा दिया गया है अहो विभूमनश चरितं विडंबनम्: "आप पूर्ण पूर्ण संपूर्ण हैं और आपका जन्म और लीलाएँ भौतिक दुनिया में सामान्य व्यक्तियों की गतिविधियों की केवल एक नकल हैं। आप केवल उच्च नियंत्रण में होने का दिखावा करते हैं।"
