इस पद में, जो व्यक्ति भक्तिमय जीवन के निम्नतम चरणों से आगे बढ़ना चाहता है, उसके लिए उन्नत ऋषियों के साथ सीधे या उनके निर्देशों को सुनकर संघ करने की सिफारिश की जाती है। एक नए भक्त को निर्दोष जीवों और अपने शरीर और मन के खिलाफ हिंसा के अधिक स्पष्ट पापों से मुक्त किया जा सकता है, लेकिन जब तक वह भक्ति पथ पर बहुत उन्नत नहीं हो जाता, तब तक उसे हमेशा झूठे अभिमान, सम्मानीय वैष्णवों के प्रति अनादर और दुखी जीवों के लिए करुणा की कमी के सूक्ष्म संदूषणों से जूझना होगा। अपरिपक्वता के इन लक्षणों के लिए सबसे अच्छा उपाय है शुद्ध वैष्णवों से सुनना और उनका सम्मान करना और गिरी हुई, वातानुकूलित आत्माओं को वितरित करने के लिए काम करने में उनकी सहायता करना।
