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श्रीमद् भागवतम
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स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ
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अध्याय 83: कृष्ण की रानियों से द्रौपदी की भेंट
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श्लोक 39
श्लोक
10.83.39
आत्मारामस्य तस्येमा वयं वै गृहदासिका: ।
सर्वसङ्गनिवृत्त्याद्धा तपसा च बभूविम ॥ ३९ ॥
अनुवाद
इस प्रकार सांसारिक संगति को त्याग कर और कठोर तपस्या करके, हम रानियाँ आत्मसंतुष्ट परमेश्वर की दासियाँ बन गई हैं।
इस प्रकार सांसारिक संगति को त्याग कर और कठोर तपस्या करके, हम रानियाँ आत्मसंतुष्ट परमेश्वर की दासियाँ बन गई हैं।
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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