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श्रीमद् भागवतम
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स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ
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अध्याय 83: कृष्ण की रानियों से द्रौपदी की भेंट
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श्लोक 37
श्लोक
10.83.37
पिता मे पूजयामास सुहृत्सम्बन्धिबान्धवान् ।
महार्हवासोऽलङ्कारै: शय्यासनपरिच्छदै: ॥ ३७ ॥
अनुवाद
मेरे पिताजी ने अपने मित्रों, परिजनों और ससुराल वालों का बहुमूल्य वस्त्रों, आभूषणों, शाही पलंगों, सिंहासनों और अन्य साज-सामान से सत्कार किया।
My father honoured his friends, family members and my in-laws with precious clothes, jewellery, royal beds, thrones and other paraphernalia.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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