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श्लोक 10.83.35  |
ते शार्ङ्गच्युतबाणौघै: कृत्तबाह्वङ्घ्रिकन्धरा: ।
निपेतु: प्रधने केचिदेके सन्त्यज्य दुद्रुवु: ॥ ३५ ॥ |
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| अनुवाद |
| ये योद्धा भगवान् के शार्ङ्ग धनुष से छूटे बाणों से पराभूत हो गये। कुछ राजाओं के हाथ, पैर और गले कट गये और वे रणक्षेत्र में गिर पड़े। बाकी लोग युद्ध छोड़कर भाग गए। |
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| ये योद्धा भगवान् के शार्ङ्ग धनुष से छूटे बाणों से पराभूत हो गये। कुछ राजाओं के हाथ, पैर और गले कट गये और वे रणक्षेत्र में गिर पड़े। बाकी लोग युद्ध छोड़कर भाग गए। |
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