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श्लोक 10.83.34  |
तेऽन्वसज्जन्त राजन्या निषेद्धुं पथि केचन ।
संयत्ता उद्धृतेष्वासा ग्रामसिंहा यथा हरिम् ॥ ३४ ॥ |
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| अनुवाद |
| राजाओं ने भगवान् का पीछा उन गांव के कुत्तों की तरह किया जो शेर का पीछा करते हैं। कुछ राजाओं ने अपने धनुष उठाए हुए थे और राह में ही उन्हें रोकने के लिए आ डटे। |
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| राजाओं ने भगवान् का पीछा उन गांव के कुत्तों की तरह किया जो शेर का पीछा करते हैं। कुछ राजाओं ने अपने धनुष उठाए हुए थे और राह में ही उन्हें रोकने के लिए आ डटे। |
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