श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 83: कृष्ण की रानियों से द्रौपदी की भेंट  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  10.83.22 
आदाय व्यसृजन् केचित् सज्यं कर्तुमनीश्वरा: ।
आकोष्ठं ज्यां समुत्कृष्य पेतुरेकेऽमुना हता: ॥ २२ ॥
 
 
अनुवाद
उनमें से कुछ ने धनुष तो उठा लिया, पर डोरी न चढ़ा पाए, तो निराश होकर एक ओर फेंक दिया। कुछ ने तो धनुष पर डोरी चढ़ाई, पर डोरी पीछे लीक गई और वो ज़मीन पर औंधे मुँह गिर पड़े।
 
Some of them picked up the bow but could not string it, so in frustration they threw it aside. Some pulled the string to the end of the bow, but this caused the bow to bounce back and throw them to the ground.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)