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bhagavat 10.83.2: ब्रह्मांड के स्वामी के चरणों को देखकर सभी पापों से मुक्त होकर राजा युधिष्ठिर और अन्य लोगों ने अत्यधिक सम्मान का अनुभव किया और खुशी-खुशी उनके सभी प्रश्नों का उत्तर दिया।   |   bhagavat अध्याय 10.83: कृष्ण की रानियों से द्रौपदी की भेंट   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 83: कृष्ण की रानियों से द्रौपदी की भेंट  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  10.83.2 
त एवं लोकनाथेन परिपृष्टा: सुसत्कृता: ।
प्रत्यूचुर्हृष्टमनसस्तत्पादेक्षाहतांहस: ॥ २ ॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मांड के स्वामी के चरणों को देखकर सभी पापों से मुक्त होकर राजा युधिष्ठिर और अन्य लोगों ने अत्यधिक सम्मान का अनुभव किया और खुशी-खुशी उनके सभी प्रश्नों का उत्तर दिया।
 
Freed from all sins by seeing the feet of the Lord of the Universe, King Yudhishthira and the others, feeling highly honoured, gladly answered his questions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)