“परंतु सच्चाई तो यह है कि तुम गोपियाँ अपने पिछले जन्मों में योग की महान आचार्य थी, और इसलिए तुम्हें पहले से ही ज्ञान-योग का यह विज्ञान पता होना चाहिए। इसके अलावा, क्या मैं इसे स्वयं या मेरे प्रतिनिधि, जैसे उद्धव के माध्यम से तुम्हें पढ़ाने की कोशिश करूं, यह वांछित परिणाम नहीं देगा। ज्ञान-योग केवल उन लोगों को दुख देता है जो परमात्मा के शुद्ध प्रेम में पूरी तरह से डूबे हुए हैं।”
