अप्यवध्यायथास्मान् स्विदकृतज्ञाविशङ्कया ।
नूनं भूतानि भगवान् युनक्ति वियुनक्ति च ॥ ४२ ॥
अनुवाद
क्या तुम्हें लगता है कि मैं कृतघ्न हूँ और इसलिए तुम मुझसे घृणा करती हो? आख़िरकार, जीवों को साथ लाना और फिर उन्हें अलग करना, सिर्फ़ भगवान ही कर सकते हैं।
Perhaps you think that I am ungrateful and that is why you look at me with hatred? Ultimately, it is God who brings all beings together and then separates them.
तात्पर्य
श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती गोपियों के विचारों का खुलासा करते हुए कहते हैं : "हम आपके जैसे नहीं हैं आपने दिन-रात हमें याद करके अपना ध्यान तोड़ डाला आपने अपने अलगाव की पीड़ा में सभी सुखों को त्याग दिया। जबकि हमने तो आपको बिल्कुल याद ही नहीं किया नहीं, बल्कि हम तो आपके बिना भी काफी खुश थे।" इसके जवाब में कृष्ण यहाँ पूछते हैं की क्या वे कृतघ्नता का विरोध करते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥