श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 82: वृन्दावनवासियों से कृष्ण तथा बलराम की भेंट  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  10.82.40 
भगवांस्तास्तथाभूता विविक्त उपसङ्गत: ।
आश्लिष्यानामयं पृष्ट्वा प्रहसन्निदमब्रवीत् ॥ ४० ॥
 
 
अनुवाद
जब गोपियाँ भावविभोर होकर खड़ी थीं, तब भगवान एकांत स्थान में उनके पास पहुँचे। उनमें से हर एक को आलिंगन करने और उनका हाल-चाल पूछने के बाद, वे हँसे और इस प्रकार बोले।
 
While the gopis were standing immersed in devotion, the Lord approached them in a secluded place. After embracing each one and asking about their well-being, He began to laugh and spoke as follows.
तात्पर्य
श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती टिप्पणी करते है कि कृष्ण ने अपनी विभीति-शक्ति द्वारा स्वंय का विस्तार किया और सभी गोपियों को व्यक्तिगत रूप से आलिंगन किया, इस प्रकार उन सभी को उनकी तंद्रा से जगाया। उन्होंने पूछा, "क्या अब तुम अपने अलगाव के दर्द से मुक्त हो?" और उनकी आत्माओं को हल्का करने में मदद करने के लिए हँसे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)