Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.82.33: वसुदेव ने नन्द महाराज को हर्ष के आवेश में गले लगाया। प्रेम के अतिरेक से वसुदेव को कंस के उन कष्टों का स्मरण हो आया जिसके कारण उन्हें अपने पुत्रों को सुरक्षित रखने के लिए गोकुल छोड़ना पड़ा। | bhagavat अध्याय 10.82: वृन्दावनवासियों से कृष्ण तथा बलराम की भेंट । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वसुदेव ने नन्द महाराज को हर्ष के आवेश में गले लगाया। प्रेम के अतिरेक से वसुदेव को कंस के उन कष्टों का स्मरण हो आया जिसके कारण उन्हें अपने पुत्रों को सुरक्षित रखने के लिए गोकुल छोड़ना पड़ा।
Vasudeva embraced Nanda Maharaja with great joy. Overwhelmed with love, Vasudeva remembered the sufferings caused by Kamsa, because of which he was forced to leave his sons in Gokul for their protection.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥