Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 10.82.32: नन्द को देखते ही समस्त वृष्णि जाति प्रसन्नता से भर उठी और वे इस तरह खड़े दिखाई दिए, मानो मृत शरीरों में पुनः प्राण आ गया हो। उन्हें दीर्घकाल से न देखने के कारण बहुत ही अधिक कष्ट का सामना करना पड़ा था, अतः उन्होंने नन्द जी को हृदय से लगा लिया।   |   bhagavat अध्याय 10.82: वृन्दावनवासियों से कृष्ण तथा बलराम की भेंट   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 82: वृन्दावनवासियों से कृष्ण तथा बलराम की भेंट  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  10.82.32 
तं द‍ृष्ट्वा वृष्णयो हृष्टास्तन्व: प्राणमिवोत्थिता: ।
परिषस्वजिरे गाढं चिरदर्शनकातरा: ॥ ३२ ॥
 
 
अनुवाद
नन्द को देखते ही समस्त वृष्णि जाति प्रसन्नता से भर उठी और वे इस तरह खड़े दिखाई दिए, मानो मृत शरीरों में पुनः प्राण आ गया हो। उन्हें दीर्घकाल से न देखने के कारण बहुत ही अधिक कष्ट का सामना करना पड़ा था, अतः उन्होंने नन्द जी को हृदय से लगा लिया।
 
On seeing Nanda, all the Vrishnis became happy and stood up as if life had come back to their dead bodies. Feeling very sad due to not seeing him for a long time, they embraced Nanda tightly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)