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bhagavat 10.82.20: श्री वसुदेव ने कहा: हे बहन, हम पर क्रोध मत करो। हम आम इंसान हैं और भाग्य के खिलौने हैं। निश्चय ही, मनुष्य चाहे अपने आप कार्य करे या दूसरों द्वारा उसे ऐसा करने के लिए मजबूर किया जाए, वह हमेशा भगवान के नियंत्रण में ही रहता है।   |   bhagavat अध्याय 10.82: वृन्दावनवासियों से कृष्ण तथा बलराम की भेंट   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 82: वृन्दावनवासियों से कृष्ण तथा बलराम की भेंट  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  10.82.20 
श्रीवसुदेव उवाच
अम्ब मास्मानसूयेथा दैवक्रीडनकान् नरान् ।
ईशस्य हि वशे लोक: कुरुते कार्यतेऽथ वा ॥ २० ॥
 
 
अनुवाद
श्री वसुदेव ने कहा: हे बहन, हम पर क्रोध मत करो। हम आम इंसान हैं और भाग्य के खिलौने हैं। निश्चय ही, मनुष्य चाहे अपने आप कार्य करे या दूसरों द्वारा उसे ऐसा करने के लिए मजबूर किया जाए, वह हमेशा भगवान के नियंत्रण में ही रहता है।
 
Sri Vasudeva said: O sister, do not be angry with us. We ordinary people are but toys of fate. Indeed, whether a man acts on his own or is compelled by others to do so, he is always under the control of the Lord.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)