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bhagavat 10.82.11: तब, अपने एकमात्र आराध्यदेव श्री कृष्ण की आज्ञा से वृष्णियों ने अपना नाश्ता किया और फिर आराम से उन पेड़ों के नीचे बैठ गये जो उन्हें ठंडी छाया प्रदान कर रहे थे।   |   bhagavat अध्याय 10.82: वृन्दावनवासियों से कृष्ण तथा बलराम की भेंट   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 82: वृन्दावनवासियों से कृष्ण तथा बलराम की भेंट  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  10.82.11 
स्वयं च तदनुज्ञाता वृष्णय: कृष्णदेवता: ।
भुक्त्वोपविविशु: कामं स्‍निग्धच्छायाङ्‍‍घ्रिपाङ्‍‍घ्रिषु ॥ ११ ॥
 
 
अनुवाद
तब, अपने एकमात्र आराध्यदेव श्री कृष्ण की आज्ञा से वृष्णियों ने अपना नाश्ता किया और फिर आराम से उन पेड़ों के नीचे बैठ गये जो उन्हें ठंडी छाया प्रदान कर रहे थे।
 
Then, with the permission of their only worshipped deity, Lord Krishna, the Vrishnis had breakfast and when they were free, they sat under trees providing cool shade.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)