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bhagavat 10.81.8: इस तरह सोचते हुए, भगवान् ने ब्राह्मण के कपड़े से कपड़े के पुराने टुकड़े में बंधे चावल के दानों को झपट लिया और बोले, "यह क्या है?"   |   bhagavat अध्याय 10.81: भगवान् द्वारा सुदामा ब्राह्मण को वरदान   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 81: भगवान् द्वारा सुदामा ब्राह्मण को वरदान  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  10.81.8 
इत्थं विचिन्त्य वसनाच्चीरबद्धान्द्विजन्मन: ।
स्वयं जहार किमिदमिति पृथुकतण्डुलान् ॥ ८ ॥
 
 
अनुवाद
इस तरह सोचते हुए, भगवान् ने ब्राह्मण के कपड़े से कपड़े के पुराने टुकड़े में बंधे चावल के दानों को झपट लिया और बोले, "यह क्या है?"
 
Thinking thus, the Lord snatched the rice grains tied in an old piece of cloth from the Brahmana's clothes and said, "What is this?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)