श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 81: भगवान् द्वारा सुदामा ब्राह्मण को वरदान  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  10.81.17 
निवासित: प्रियाजुष्टे पर्यङ्के भ्रातरो यथा ।
महिष्या वीजित: श्रान्तो बालव्यजनहस्तया ॥ १७ ॥
 
 
अनुवाद
उनके द्वारा किया गया मेरा आदर सम्मान उनके भाइयों के समान था उन्होंने मुझे अपनी प्रेमिका के पलंग पर बिठाया और थकान के कारण उनकी रानी ने स्वयं अपने हाथों से चामर से मुझ पर हवा की।
 
He treated me like one of his brothers and made me sit on the bed of his beloved. And since I was tired, his queen herself fanned me with a chamar.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)