Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.80.31: हे ब्राह्मण, क्या तुम्हें याद है कि हम अपने गुरु के आश्रम में एकसाथ कैसे रहते थे? जब कोई द्विज विद्यार्थी अपने गुरु से सीखने योग्य सभी बातों को सीख लेता है, तो वह आध्यात्मिक जीवन का आनंद उठा सकता है, जो समस्त अज्ञान से परे है। | bhagavat अध्याय 10.80: द्वारका में भगवान् श्रीकृष्ण से ब्राह्मण सुदामा की भेंट । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कच्चिद् गुरुकुले वासं ब्रह्मन् स्मरसि नौ यत: ।
द्विजो विज्ञाय विज्ञेयं तमस: पारमश्नुते ॥ ३१ ॥
अनुवाद
हे ब्राह्मण, क्या तुम्हें याद है कि हम अपने गुरु के आश्रम में एकसाथ कैसे रहते थे? जब कोई द्विज विद्यार्थी अपने गुरु से सीखने योग्य सभी बातों को सीख लेता है, तो वह आध्यात्मिक जीवन का आनंद उठा सकता है, जो समस्त अज्ञान से परे है।
O Brahmana, do you remember how we lived together in our Guru's school? When a Dvija student has learned all that is learnable from his Guru, he can enjoy the spiritual life, which is beyond all ignorance.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥