श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 80: द्वारका में भगवान् श्रीकृष्ण से ब्राह्मण सुदामा की भेंट  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  10.80.14 
याचित्वा चतुरो मुष्टीन् विप्रान् पृथुकतण्डुलान् ।
चैलखण्डेन तान् बद्ध्वा भर्त्रे प्रादादुपायनम् ॥ १४ ॥
 
 
अनुवाद
सुदामा की भार्या ने अपने आस-पड़ोस के ब्राह्मणों से चार मुट्ठी चावल माँगे और उन्हें एक फटे कपड़े में बाँधकर अपने पति को भगवान कृष्ण के लिए उपहार के तौर पर दे दिया।
 
Sudama's wife asked for four handfuls of rice (chiura) from her neighboring Brahmins, tied them in a piece of torn cloth and gave it to her husband as a gift for Lord Krishna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)