कंस: पापमति: सख्यं तव चानकदुन्दुभे: ।
देवक्या अष्टमो गर्भो न स्त्री भवितुमर्हति ॥ ८ ॥
इति सञ्चिन्तयञ्छ्रुत्वा देवक्या दारिकावच: ।
अपि हन्ता गताशङ्कस्तर्हि तन्नोऽनयो भवेत् ॥ ९ ॥
अनुवाद
"कंस बड़ा चतुर नीतिज्ञ और बेहद पापी भी है। इसलिए देवकी की पुत्री योगमाया से यह सुनकर कि उसे मारने वाला बालक कहीं और भी जन्म ले चुका है और यह सुनकर की देवकी के आठवें गर्भ से कन्या जन्म नहीं होगा और यह जानते हुए कि वसुदेव से आपकी मित्रता है, जब कंस सुनेंगे कि यदुकुल के पुरोहित द्वारा संस्कार करवाया गया है तो इन्हीं सब बातों से उसे यकीनन संदेह होगा कि कृष्ण ही देवकी और वसुदेव का पुत्र है। तब वो कृष्ण को मार डालने के उपाय करेगा, जो कि बहुत बड़ी विपत्ति होगी।"
“Kans is a great diplomat as well as a very sinful person. Therefore, after hearing from Devaki's daughter Yogmaya that the child who was to kill her has been born somewhere else and after hearing that Devaki's eighth pregnancy cannot produce a daughter and knowing that you are friends with Vasudeva, when Kans will hear that the priest of the Yadu clan has performed the ceremony by me, then all these things will definitely make him doubt that Krishna is the son of Devaki and Vasudeva. Then he will take measures to kill Krishna and this will prove to be a great disaster.
तात्पर्य
कंस को भली भाँति ज्ञात था कि योगमाया वस्तुतः कृष्ण-विष्णु की दासी है और देवकी की पुत्री के रूप में अवतीर्ण होते हुए भी योगमाया को इस तथ्य को प्रकाशित करने से निषेध किया जा सकता है। वस्तुतः यही हुआ था। गर्ग मुनि ने अत्यंत सोच-समझकर कहा कि कृष्ण के लिए संस्कार-क्रिया में भाग लेने से संदेह उत्पन्न होगा, जिससे कंस बालक का वध करने के लिए कठोर कदम उठा सकता है। कंस ने इस बालक को मारने के लिए पहले भी अनेक असुर भेजे थे, पर उनमें से कोई भी जीवित नहीं बच पाया था। यदि गर्ग मुनि संस्कार-क्रिया करते हैं तो कंस का संदेह पूरी तरह निश्चित हो जाएगा और वह कठोर से कठोर उपाय करेगा। गर्गमुनि ने यह चेतावनी नंद महाराज को दी।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥