श्रीगर्ग उवाच
यदूनामहमाचार्य: ख्यातश्च भुवि सर्वदा ।
सुतं मया संस्कृतं ते मन्यते देवकीसुतम् ॥ ७ ॥
अनुवाद
गर्ग मुनि ने कहा: हे नंद महाराज, मैं यदुवंश का पुरोहित हूं। यह सर्वविदित है। इसलिए, यदि मैं आपके पुत्रों का संस्कार पूर्ण करता हूं तो कंस समझेगा कि वे देवकी के पुत्र हैं।
Gargmuni said: O Nanda Maharaj, I am the priest of Yadukul. This is well known. Therefore, if I perform the rituals of your sons, Kansa will think that they are the sons of Devaki.
तात्पर्य
गर्ग मुनि ने अप्रत्यक्ष रूप से यह प्रकट किया कि कृष्ण देवकी के पुत्र हैं, यशोदा के नहीं। चूंकि कंस पहले से ही कृष्ण की खोज में थे, यदि गर्ग मुनि शांतिपूर्ण प्रक्रिया करते तो कंस को इसकी सूचना मिल जाती, जिससे एक आपदा खड़ी हो जाती। यह तर्क दिया जा सकता है कि हालांकि गर्ग मुनि यादव वंश के पुरोहित थे, नंद महाराज भी उसी वंश से संबंधित थे। हालांकि, नंद महाराज क्षत्रिय के रूप में कार्य नहीं कर रहे थे। इसलिए गर्ग मुनि ने कहा, "यदि मैं तुम्हारे पुरोहित के रूप में कार्य करता हूं, तो इससे यह पुष्टि होगी कि कृष्ण देवकी के पुत्र हैं।"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥