| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ » अध्याय 8: भगवान् कृष्ण द्वारा अपने मुख के भीतर विराट रूप का प्रदर्शन » श्लोक 45 |
|
| | | | श्लोक 10.8.45  | त्रय्या चोपनिषद्भिश्च साङ्ख्ययोगैश्च सात्वतै: ।
उपगीयमानमाहात्म्यं हरिं सामन्यतात्मजम् ॥ ४५ ॥ | | | | | | अनुवाद | | ईश्वर की महिमा का अध्ययन तीनों वेद, उपनिषद, सांख्य योग के ग्रंथ और अन्य वैष्णव साहित्य के माध्यम से तो किया जाता है, किंतु माँ यशोदा परम पुरुष को अपना साधारण बालक ही मानती रहीं। | | | | ईश्वर की महिमा का अध्ययन तीनों वेद, उपनिषद, सांख्य योग के ग्रंथ और अन्य वैष्णव साहित्य के माध्यम से तो किया जाता है, किंतु माँ यशोदा परम पुरुष को अपना साधारण बालक ही मानती रहीं। | | ✨ ai-generated | | |
|
|