माता यशोदा भगवान् की कृपा से असली सत्य को समझ गईं थीं। लेकिन इसके बावजूद, परम स्वामी ने अपनी आंतरिक शक्ति योगमाया के प्रभाव से उन्हें प्रेरित किया कि वे अपने पुत्र के प्रति गहन मातृ प्रेम में लीन हो जाएं।
Mother Yashoda understood the real truth by the grace of the Lord. But by the influence of the inner power, Yogamaya, the Supreme Lord induced her to become absorbed in the intense maternal love for her son.
तात्पर्य
जहाँ माता यशोदा जीवन के पूरे दर्शन को समझ रही थीं, वहीं अगले ही क्षण योग माया के प्रभाव से वह अपने पुत्र के लिए वात्सल्य से अभिभूत हो गईं। उन्हें लगा कि यदि वह अपने पुत्र कृष्ण की देखभाल नहीं करेंगी तो उनकी रक्षा कैसे होगी? वह इसके अलावा कुछ सोच नहीं सकती थीं और इस प्रकार उन्होंने अपने सभी दार्शनिक अनुमानों को भूल गईं। श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर ने इस भूलने को योग माया के प्रभाव (मोहन-साधर्म्यान् मायाम्) से प्रेरित बताया है। भौतिकवादी लोग महामाया द्वारा मोहित होते हैं, जबकि भक्त, आध्यात्मिक ऊर्जा की व्यवस्था द्वारा, योग-माया द्वारा मोहित होते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥