श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 8: भगवान् कृष्ण द्वारा अपने मुख के भीतर विराट रूप का प्रदर्शन  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  10.8.33 
सा गृहीत्वा करे कृष्णमुपालभ्य हितैषिणी ।
यशोदा भयसम्भ्रान्तप्रेक्षणाक्षमभाषत ॥ ३३ ॥
 
 
अनुवाद
कृष्ण के साथियों से यह बात सुनकर हितकारी माता यशोदा ने कृष्ण के मुँह के भीतर देखने और डाँटने के लिए उन्हें हाथों से उठा लिया। घबराई हुई आँखों से उन्होंने पुत्र से इस प्रकार कहा।
 
कृष्ण के साथियों से यह बात सुनकर हितकारी माता यशोदा ने कृष्ण के मुँह के भीतर देखने और डाँटने के लिए उन्हें हाथों से उठा लिया। घबराई हुई आँखों से उन्होंने पुत्र से इस प्रकार कहा।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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