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bhagavat 10.8.1: श्री शुकदेव गोस्वामी कथन करते हैं: हे महाराज परीक्षित, यदुवंश के श्रेष्ठ तपस्वी पुरोहित गर्ग मुनि को वसुदेव ने प्रेरित किया और कहा कि वे नन्द महाराज के घर जाकर उनसे मिले।   |   bhagavat अध्याय 10.8: भगवान् कृष्ण द्वारा अपने मुख के भीतर विराट रूप का प्रदर्शन   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 8: भगवान् कृष्ण द्वारा अपने मुख के भीतर विराट रूप का प्रदर्शन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  10.8.1 
श्रीशुक उवाच
गर्ग: पुरोहितो राजन् यदूनां सुमहातपा: ।
व्रजं जगाम नन्दस्य वसुदेवप्रचोदित: ॥ १ ॥
 
 
अनुवाद
श्री शुकदेव गोस्वामी कथन करते हैं: हे महाराज परीक्षित, यदुवंश के श्रेष्ठ तपस्वी पुरोहित गर्ग मुनि को वसुदेव ने प्रेरित किया और कहा कि वे नन्द महाराज के घर जाकर उनसे मिले।
 
Sukadeva Goswami said: O Maharaja Pariksit, Vasudeva then motivated Gargamuni, the priest of the Yadu clan and one who was advanced in asceticism, to go to the home of Nanda Maharaja and meet him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)