श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 79: भगवान् बलराम की तीर्थयात्रा  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  10.79.6 
सोऽपतद्भ‍ुवि निर्भिन्नललाटोऽसृक् समुत्सृजन् ।
मुञ्चन्नार्तस्वरं शैलो यथा वज्रहतोऽरुण: ॥ ६ ॥
 
 
अनुवाद
पीड़ा से कराहता हुआ बल्वल पृथ्वी पर गिर पड़ा। उसके सिर पर गहरी चोट थी और ज़ोर से खून बह रहा था। वो ऐसे लग रहा था जैसे विजली से बिंधे हुए लाल पहाड़ पर खून की बौछार हो रही हो।
 
पीड़ा से कराहता हुआ बल्वल पृथ्वी पर गिर पड़ा। उसके सिर पर गहरी चोट थी और ज़ोर से खून बह रहा था। वो ऐसे लग रहा था जैसे विजली से बिंधे हुए लाल पहाड़ पर खून की बौछार हो रही हो।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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