श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 79: भगवान् बलराम की तीर्थयात्रा  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  10.79.31 
तेभ्यो विशुद्धं विज्ञानं भगवान् व्यतरद् विभु: ।
येनैवात्मन्यदो विश्वमात्मानं विश्वगं विदु: ॥ ३१ ॥
 
 
अनुवाद
सर्वशक्तिमान भगवान बलरामजी ने ऋषियों को विशुद्ध आध्यात्मिक ज्ञान दिया, जिससे वे सभी परमात्मा बलरामजी के भीतर संपूर्ण ब्रह्मांड का दर्शन कर सकें और यह भी अनुभव कर सकें कि वे हर वस्तु में व्याप्त हैं।
 
सर्वशक्तिमान भगवान बलरामजी ने ऋषियों को विशुद्ध आध्यात्मिक ज्ञान दिया, जिससे वे सभी परमात्मा बलरामजी के भीतर संपूर्ण ब्रह्मांड का दर्शन कर सकें और यह भी अनुभव कर सकें कि वे हर वस्तु में व्याप्त हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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