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श्लोक 10.79.27  |
तस्मादेकतरस्येह युवयो: समवीर्ययो: ।
न लक्ष्यते जयोऽन्यो वा विरमत्वफलो रण: ॥ २७ ॥ |
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| अनुवाद |
| चूंकि तुम दोनों युद्ध-बल में बराबर-बराबर हो, इसलिए मैं समझ नहीं पा रहा कि तुम में से कोई इस युद्ध में कैसे जीतेगा या हारेगा। इसलिए कृपा करके इस व्यर्थ के युद्ध को रोक दो। |
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| चूंकि तुम दोनों युद्ध-बल में बराबर-बराबर हो, इसलिए मैं समझ नहीं पा रहा कि तुम में से कोई इस युद्ध में कैसे जीतेगा या हारेगा। इसलिए कृपा करके इस व्यर्थ के युद्ध को रोक दो। |
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