श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 79: भगवान् बलराम की तीर्थयात्रा  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  10.79.2 
ततोऽमेध्यमयं वर्षं बल्वलेन विनिर्मितम् ।
अभवद् यज्ञशालायां सोऽन्वद‍ृश्यत शूलधृक् ॥ २ ॥
 
 
अनुवाद
इसके पश्चात् बलि-वेदी पर बल्वल द्वारा भेजी गई घृणित वस्तुओं की झड़ी लग गई। फिर वह दानव स्वयं अपने हाथ में त्रिशूल लिए प्रकट हुआ।
 
इसके पश्चात् बलि-वेदी पर बल्वल द्वारा भेजी गई घृणित वस्तुओं की झड़ी लग गई। फिर वह दानव स्वयं अपने हाथ में त्रिशूल लिए प्रकट हुआ।
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