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श्लोक 10.79.2  |
ततोऽमेध्यमयं वर्षं बल्वलेन विनिर्मितम् ।
अभवद् यज्ञशालायां सोऽन्वदृश्यत शूलधृक् ॥ २ ॥ |
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| अनुवाद |
| इसके पश्चात् बलि-वेदी पर बल्वल द्वारा भेजी गई घृणित वस्तुओं की झड़ी लग गई। फिर वह दानव स्वयं अपने हाथ में त्रिशूल लिए प्रकट हुआ। |
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| इसके पश्चात् बलि-वेदी पर बल्वल द्वारा भेजी गई घृणित वस्तुओं की झड़ी लग गई। फिर वह दानव स्वयं अपने हाथ में त्रिशूल लिए प्रकट हुआ। |
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