श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 79: भगवान् बलराम की तीर्थयात्रा  »  श्लोक 11-15
 
 
श्लोक  10.79.11-15 
गोमतीं गण्डकीं स्‍नात्वा विपाशां शोण आप्लुत: ।
गयां गत्वा पितृनिष्ट्वा गङ्गासागरसङ्गमे ॥ ११ ॥
उपस्पृश्य महेन्द्राद्रौ रामं द‍ृष्ट्वाभिवाद्य च ।
सप्तगोदावरीं वेणां पम्पां भीमरथीं तत: ॥ १२ ॥
स्कन्दं द‍ृष्ट्वा ययौ राम: श्रीशैलं गिरिशालयम् ।
द्रविडेषु महापुण्यं द‍ृष्ट्वाद्रिं वेङ्कटं प्रभु: ॥ १३ ॥
कामकोष्णीं पुरीं काञ्चीं कावेरीं च सरिद्वराम् ।
श्रीरङ्गाख्यं महापुण्यं यत्र सन्निहितो हरि: ॥ १४ ॥
ऋषभाद्रिं हरे: क्षेत्रं दक्षिणां मथुरां तथा ।
सामुद्रं सेतुमगमत्महापातकनाशनम् ॥ १५ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान बलराम ने गोमती, गण्डकी और विपाशा नदियों में स्नान किया और शोण नदी में डुबकी लगाई। उन्होंने गया जाकर अपने पूर्वजों की पूजा की और गंगामुख पर जाकर पवित्र स्नान किया। महेंद्र पर्वत पर उन्होंने भगवान परशुराम के दर्शन किए और उनकी स्तुति की। उसके बाद, उन्होंने गोदावरी नदी की सातों शाखाओं के साथ-साथ वेणा, पम्पा और भीमरथी नदियों में स्नान किया। फिर, बलराम भगवान स्कंद से मिले और भगवान गिरिश के धाम श्रीशैल गए। द्रविड़ देश के दक्षिणी प्रांतों में, उन्होंने पवित्र वेंकट पर्वत, कामकोष्णी और कांची शहर, पवित्र कावेरी नदी और सबसे पवित्र श्रीरंग देखा, जहां भगवान कृष्ण स्वयं प्रकट हुए थे। वहां से, वे ऋषभ पर्वत गए, जहां भगवान कृष्ण भी निवास करते हैं, और फिर दक्षिण मथुरा गए। उसके बाद, वे सेतुबंध गए, जहां सबसे बड़े पाप भी नष्ट हो जाते हैं।
 
Lord Balarama bathed in the Gomati, Gandaki and Vipasa rivers and also took a dip in the Shona. He went to Gaya where he worshipped his ancestors. At Gangamukha he bathed for purification. At Mahendra mountain he saw Parashurama and offered his prayers to Him. After that he bathed in all the seven branches of the Godavari river. He also bathed in the Vena, Pampa and Bhimarathi rivers. Then Balarama met Lord Skanda and went to Srisailam, the abode of Lord Girish. In the southern provinces, called the Dravida country, the Lord saw the sacred Venkata mountain, the cities of Kamakoshini and Kanchi, the sacred Kaveri river and the most sacred Sriranga, where Lord Krishna himself appeared. From there he went to Rishabha mountain where Krishna also lives and then south to Mathura. After that he went to Setubandha where the greatest sins are destroyed.
तात्पर्य
आमतौर पर गया में मृत पूर्वजों की पूजा करने जाते हैं। लेकिन श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती बताते हैं कि यद्यपि भगवान बलराम के पिता और दादा अभी भी जीवित थे, पर उनके पिताजी के आदेश पर, उन्होंने गया में अपने पूर्वजों की यथाविधि पूजा की थी। वैष्णव-तोषणी से दृष्टिकोण प्राप्त करते हुए आचार्य आगे बताते हैं कि यद्यपि भगवान बलराम, जगन्नाथ पुरी के काफी समीप थे, फिर भी वह वहाँ नहीं गए क्योंकि वह स्वयं भगवान श्री कृष्ण, बलभद्र व सुभद्रा के सम्मुख अपनी पूजा करने की शर्मिंदगी से बचना चाहते थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)