Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.78.8: यद्यपि दंतवक्र की गदा के प्रहार से आघात हुआ, किन्तु यदुकुल के उद्धारक श्रीकृष्ण युद्धस्थल में अपने स्थान से तनिक भी नहीं डगे। इसके विपरीत अपनी विशाल कौमोदकी गदा से उन्होंने दंतवक्र की छाती के मध्य भाग में प्रहार किया। | bhagavat अध्याय 10.78: दन्तवक्र, विदूरथ तथा रोमहर्षण का वध । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गदयाभिहतोऽप्याजौ न चचाल यदूद्वह: ।
कृष्णोऽपि तमहन् गुर्व्या कौमोदक्या स्तनान्तरे ॥ ८ ॥
अनुवाद
यद्यपि दंतवक्र की गदा के प्रहार से आघात हुआ, किन्तु यदुकुल के उद्धारक श्रीकृष्ण युद्धस्थल में अपने स्थान से तनिक भी नहीं डगे। इसके विपरीत अपनी विशाल कौमोदकी गदा से उन्होंने दंतवक्र की छाती के मध्य भाग में प्रहार किया।
Although he was hit by Dantavakra's mace, Krishna, the savior of the Yadavas, did not move even a bit from his place on the battlefield. Rather, he struck Dantavakra right in the middle of his chest with his heavy Kaumodaki mace.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥