श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 78: दन्तवक्र, विदूरथ तथा रोमहर्षण का वध  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  10.78.40 
ततश्च भारतं वर्षं परीत्य सुसमाहित: ।
चरित्वा द्वादश मासांस्तीर्थस्‍नायी विशुध्यसि ॥ ४० ॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात, आप बारह महीनों तक गम्भीरतापूर्वक ध्यान करते हुए भारत भूमि की परिक्रमा करें, तपस्या करते हुए और विविध पवित्र तीर्थस्थानों में स्नान करें। इस प्रकार आप पवित्र होंगे।
 
After that you should go around India for twelve months in a state of deep meditation and take bath in various holy places while performing austerities. In this way you will be able to become pure.
तात्पर्य
श्रील जीव गोस्वामी इस बात की ओर संकेत करते हैं कि विश्व सुध्यसी शब्द का अर्थ है कि भगवान बलराम लोगों के लिए आदर्श उदाहरण स्थापित करके निर्मल प्रसिद्धि प्राप्त करेंगे।

श्रील प्रभुपाद लिखते हैं, ''ब्राह्मण भगवान के उद्देश्य को समझ सकते हैं, और इस तरह उन्होंने सुझाव दिया कि वह जिस तरह से लाभकारी होंगे, वह प्रायश्चित करें।''

 
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध दस के अंतर्गत अठहत्तर अध्याय समाप्त होता है ।
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)