श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 78: दन्तवक्र, विदूरथ तथा रोमहर्षण का वध  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  10.78.37 
किं व: कामो मुनिश्रेष्ठा ब्रूताहं करवाण्यथ ।
अजानतस्त्वपचितिं यथा मे चिन्त्यतां बुधा: ॥ ३७ ॥
 
 
अनुवाद
हे मुनिश्रेष्ठो, अपनी इच्छा बताइए, मैं उसे ज़रूर पूरा करूँगा। और हे बुद्धिमान आत्माओं, मेरे लिए समुचित प्रायश्चित्त का भलीभाँति निर्धारण कर दें, क्योंकि मैं नहीं जानता कि वह क्या हो सकता है।
 
O great sages, please tell me your wish. I will surely fulfill it. And O wise souls, please determine the appropriate atonement for me, because I do not know what it could be.
तात्पर्य
भगवान बलराम यहां आम लोगों के लिए विद्वान ब्राह्मणों के सामने नम्रतापूर्वक खुद को समर्पित कर एक आदर्श उदाहरण स्थापित करते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)